इलेक्ट्रॉनिक मीडिया टीआरपी और विज्ञापन से हाेने वाले मुनाफ़े में व्यस्त है। प्रिंट मीडिया भी अब टीवी और सोशल मीडिया पर निर्भर हो चुका है। उसकी हालत भी उन जैसी ही हो चुकी है। प्रिंट में छपे निजी या सरकारी विज्ञापनों में समाचारों काे तलाश करने के बाद पढ़ने माैका मिलता है।
ऐसे में पत्रकारों व समाचार कर्मियाें की सुरक्षा कैसे सम्भव है...???
पत्रकारिता पूर्व में समाज सेवा की श्रेणी में आती थी। परन्तु 21वीं सदी नें पत्रकारिता अब व्यापार हाे चुका है। अभी समाज सेवा की भावना रखने वाले कुछ पत्रकार जीवित हैं पर इनकी हत्या हाे रही है, पूरे भारत में। सुरक्षा के आभाव में पत्रकारिता की मृत्यु हाे जायेगी।
Wednesday, 24 June 2015
देश भर में पत्रकाराें पर हमला व हत्या चिन्ता का विषय है :-
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति लखनऊ :: संक्षिप्त परिचय:-
उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति, लखनऊ (U.P. Advocates Welfare Fund Trustee Committee) अधिवक्ताओं के हित में बनाई ...
-
वशिष्ठ जी भगवान श्रीराम के वनवास प्रकरण पर भरत जी को समझाते हैं, इस अवसर पर बाबा तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस की एक चौपाई में...
-
एक तर्क हमेशा दिया जाता है कि अगर बाबर ने राम मंदिर तोड़ा होता तो यह कैसे सम्भव होता कि महान रामभक्त और राम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलस...
-
Happy New Year - 2015 नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं New year Wishes ॥ नव वर्ष मंगलमय हो Keep the smile, leave the tear, Thin...
No comments:
Post a Comment