रक्षाबंधन (29 अगस्त 2015, शनिवार) के दिन ब्राह्मणों द्वारा श्रावणी उपाकर्म किए जाने का विधान है। यह क्रिया पवित्र नदी के घाट पर सामूहिक रूप से की जाती है। जानिए क्या है श्रावणी उपाकर्म-
श्रावणी उपाकर्म के तीन पक्ष है- प्रायश्चित संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय। सर्वप्रथम होता है- प्रायश्चित रूप में हेमाद्रि स्नान संकल्प। गुरु के सान्निध्य में ब्रह्मचारी गाय के दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र तथा पवित्र कुशा से स्नानकर वर्षभर में जाने-अनजाने में हुए पापकर्मों का प्रायश्चित कर जीवन को सकारात्मकता से भरते हैं। स्नान के बाद ऋषिपूजन, सूर्योपस्थान एवं यज्ञोपवीत पूजन तथा नवीन यज्ञोपवीत धारण करते हैं।
यज्ञोपवीत या जनेऊ आत्म संयम का संस्कार है। आज के दिन जिनका यज्ञोपवित संस्कार हो चुका होता है, वह पुराना यज्ञोपवित उतारकर नया धारण करते हैं और पुराने यज्ञोपवित का पूजन भी करते हैं । इस संस्कार से व्यक्ति का दूसरा जन्म हुआ माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति आत्म संयमी है, वही संस्कार से दूसरा जन्म पाता है और द्विज कहलाता है।
उपाकर्म का तीसरा पक्ष स्वाध्याय का है। इसकी शुरुआत सावित्री, ब्रह्मा, श्रद्धा, मेधा, प्रज्ञा, स्मृति, सदसस्पति, अनुमति, छंद और ऋषि को घी की आहुति से होती है। जौ के आटे में दही मिलाकर ऋग्वेद के मंत्रों से आहुतियां दी जाती हैं। इस यज्ञ के बाद वेद-वेदांग का अध्ययन आरंभ होता है। इस प्रकार वैदिक परंपरा में वैदिक शिक्षा साढ़े पांच या साढ़े छह मास तक चलती है। वर्तमान में श्रावणी पूर्णिमा के दिन ही उपाकर्म और उत्सर्ग दोनों विधान कर दिए जाते हैं। प्रतीक रूप में किया जाने वाला यह विधान हमें स्वाध्याय और सुसंस्कारों के विकास के लिए प्रेरित करता है।
Sunday, 30 August 2015
क्या होता है श्रावणी उपाकर्म (रक्षाबंधन) ये क्यों किया जाता है, जानिए :-
हमेशा सफल होने के लिए अपनाएं चाणक्य की ये दस बातें :-
चाणक्य की बुद्धि के कारण ही उन्हें आज जाना जाता है। एक महान अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाने वाले चाणक्य ने कई ऐसी नीतियां बनाईं थी। जिसे अपना कर आप सफलता के शिखर पर पहुंच सकते हैं। आज हम बताने जा रहे है चाणक्य की ऐसी ही दस बातें जिन पर अमल कर आप अपना जीवन सफल बना सकते हैं...!!!
1- शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पता है। शिक्षा सौंदर्य और यौवन को परास्त कर देती है।
2- अपने रहस्यों को किसी पर भी उजागर मत करो। यह आदत आपको बर्बाद कर सकती है।
3- हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है। ऐसी कोई मित्रता नहीं जिसमें स्वार्थ ना हो। यह कड़वा सच है।
4- हमें भूत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, ना ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए। विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं।
5- कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयं से तीन प्रश्न जरुर कीजिये - मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल हो पाऊगां? और जब गहरई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, तभी आगे बढें।
6- कोई व्यक्ति अपने कर्मों से महान होता है, अपने जन्म से नहीं।
7- भगवान मूर्तियों में नहीं है। आपकी अनुभूति आपका ईश्वर है। आपकी आत्मा आपका मंदिर है।
8- जैसे ही भय आपके करीब आये , उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिये।
9- एक बार जब आप कोई काम शुरु करते हैं, तो असफलता से डरे नहीं और ना ही उसे त्यागें। ईमानदारी से काम करने वाले लोग खुश रहते हैं।
10- फूल की खुशबू केवल हवा की दिशा में जाएगी। लेकिन एक अच्छे इंसान की अच्छाई सब जगह फैलेगी।
Saturday, 15 August 2015
चंदे से हाेता है इलाज...!!!
चंदे से हाेता है इलाज..... यह है अधिवक्ता की कहानी।
शर्म आती है मुझकाे अधिवक्ता के रूप में अपनी अक्षमता पर।
क्या हमारे बार एसोसिएशन व बार काउंसिल के पदाधिकारियों काे भी शर्म आती है...???
नाेट:- मैं बात कर रहा हूँ, अधिवक्ता चन्द्र माेहन गुप्ता जी की, जाे कबीरचाैरा मंडलीय अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं। जरनल वार्ड नं. 1 बेड नं. 16 कृपया मदद करें।
सही है कि Adv Gupta jee के पास व साथ कचहरी का वाेट बैंक नहीं है और इससे भी बड़ी दुर्भाग्य की बात है कि, उनके तीन पुत्र हैं। जाे इलाज में सहयाेग नहीं कर रहे हैं। यदि सही इलाज नहीं हुआ ताे वे अपंग भी हाे सकते हैं अन्यथा.....।
उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति लखनऊ :: संक्षिप्त परिचय:-
उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति, लखनऊ (U.P. Advocates Welfare Fund Trustee Committee) अधिवक्ताओं के हित में बनाई ...
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एक तर्क हमेशा दिया जाता है कि अगर बाबर ने राम मंदिर तोड़ा होता तो यह कैसे सम्भव होता कि महान रामभक्त और राम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलस...
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