उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए व्यापक मेडिक्लेम/हेल्थ इंश्योरेंस योजना का मुद्दा पिछले दो वर्षों में गंभीर रूप से उभरा है। यह केवल एक कल्याणकारी मांग नहीं रह गई है, बल्कि अब यह न्यायपालिका, बार संस्थाओं और सरकारों की जवाबदेही का प्रश्न बन चुका है। विशेष रूप से Allahabad High Court ने इस विषय पर सक्रिय हस्तक्षेप करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ और निर्देश दिए हैं।
1. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा?:-
(क) 30 मई 2024 का महत्वपूर्ण आदेश
Allahabad High Court में दायर एक जनहित याचिका में यह मुद्दा उठाया गया कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ताओं के लिए कोई समुचित स्वास्थ्य सुरक्षा योजना नहीं है।
याचिका में कहा गया कि—
•अधिवक्ता न्याय प्रणाली का अभिन्न अंग हैं।
•अनेक अधिवक्ता गंभीर बीमारी, दुर्घटना, हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज जैसी स्थितियों में आर्थिक रूप से टूट जाते हैं।
•अन्य राज्यों जैसे Delhi, Madhya Pradesh, Karnataka और Andhra Pradesh में अधिवक्ताओं के लिए कल्याणकारी योजनाएं उपलब्ध हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई व्यापक व्यवस्था नहीं है।
इस पर हाईकोर्ट की खंडपीठ (जस्टिस राजन रॉय एवं जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला) ने उत्तर प्रदेश सरकार से चार सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने को कहा और पूछा कि अधिवक्ताओं के लिए बीमा योजना क्यों नहीं बनाई जा सकती।
2. अगस्त 2024 में हाईकोर्ट का और कड़ा रुख:-
बाद की सुनवाई में न्यायालय ने सीधे Bar Council of Uttar Pradesh से पूछा कि, जब अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा उसका वैधानिक दायित्व है, तो वह मेडिक्लेम योजना क्यों नहीं बना रही?
न्यायालय ने बार काउंसिल से हलफनामा मांगा और स्पष्ट किया कि केवल नामांकन शुल्क लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अधिवक्ताओं के सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर भी कार्य होना चाहिए।
3. अप्रैल 2026 : हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर PIL दर्ज की:-
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब दो अधिवक्ताओं की गंभीर चिकित्सा स्थितियाँ न्यायालय के सामने आईं—
•एक अधिवक्ता सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए
•दूसरे अधिवक्ता ब्रेन हेमरेज से जूझ रहे थे
•दोनों मामलों में इलाज हेतु धनाभाव की समस्या सामने आई।
इस पर Allahabad High Court ने स्वतः संज्ञान लेते हुए "In Re: Suo Motu Insurance Scheme for Lawyers in State of U.P." नाम से PIL दर्ज करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने पक्षकार बनाया—
•Bar Council of Uttar Pradesh
•Awadh Bar Association
•उत्तर प्रदेश के प्रधान सचिव (विधि)
यह दर्शाता है कि अदालत अब इसे व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि संस्थागत विफलता मान रही है।
4. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) का रुख:-
Bar Council of India ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर सामूहिक बीमा योजना (Group Insurance Plan) पर कार्य करने की बात कही।
जनवरी 2025 में विभिन्न बार एसोसिएशनों से अधिवक्ताओं का डेटा मांगा गया ताकि एक राष्ट्रीय स्तर की योजना तैयार की जा सके।
यह संकेत देता है कि BCI समस्या को स्वीकार कर चुकी है, लेकिन अभी तक कोई पूर्ण राष्ट्रीय मेडिक्लेम योजना लागू नहीं हो सकी है।
5. बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश का रुख:-
Bar Council of Uttar Pradesh वर्तमान में कुछ सीमित सहायता योजनाएँ चलाती है—
•मृत्यु सहायता
•दुर्घटना सहायता
•वृद्धावस्था सहायता
•सीमित वित्तीय अनुदान
लेकिन यह योजनाएँ मेडिक्लेम का विकल्प नहीं हैं।
गंभीर बीमारियों जैसे—
•कैंसर
•हार्ट सर्जरी
•किडनी ट्रांसप्लांट
•ICU खर्च
के लिए अभी कोई सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना नहीं है।
6. केंद्र सरकार का रुख:-
Ministry of Law and Justice ने BCI के साथ समन्वय की बात कही है, लेकिन अभी तक कोई अलग केंद्रीय अधिवक्ता स्वास्थ्य बीमा योजना लागू नहीं हुई।
हालांकि केंद्र सरकार कई पेशागत वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं चला रही है, लेकिन अधिवक्ताओं के लिए अलग मेडिकल सुरक्षा नीति अभी अधूरी है।
7. उत्तर प्रदेश सरकार का रुख:-
Government of Uttar Pradesh का रुख अब तक अधिकतर “विचाराधीन” दिखाई देता है।
हाईकोर्ट के आदेशों के बाद सरकार ने जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई व्यापक योजना लागू नहीं हुई।
यही कारण है कि न्यायपालिका बार-बार हस्तक्षेप कर रही है।
मूल समस्या क्या है?
भारत में अधिकांश अधिवक्ता—
•स्वरोजगार आधारित हैं।
•नियमित वेतन नहीं पाते।
•निजी स्वास्थ्य बीमा महंगा होता है।
•वृद्ध अधिवक्ताओं की स्थिति और कठिन होती है।
जब बीमारी आती है तो कई अधिवक्ताओं को—
•चंदा
•बार एसोसिएशन सहायता
•व्यक्तिगत उधार
पर निर्भर होना पड़ता है।
यह स्थिति न्याय व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के लिए चिंताजनक है।
आगे क्या होना चाहिए?
एक आदर्श योजना में होना चाहिए—
✅ कैशलेस इलाज
✅ परिवार कवरेज
✅ गंभीर बीमारी कवर
✅ दुर्घटना बीमा
✅ टर्म लाइफ कवर
✅ वरिष्ठ अधिवक्ताओं हेतु विशेष सहायता
✅ प्रीमियम में सरकार + बार काउंसिल + अधिवक्ता का साझा योगदान
☝️निष्कर्ष
Allahabad High Court ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अधिवक्ताओं की स्वास्थ्य सुरक्षा अब टाली नहीं जा सकती।
यदि Bar Council of India, Bar Council of Uttar Pradesh, Government of India और Government of Uttar Pradesh समय रहते ठोस नीति नहीं बनाते, तो न्यायपालिका का दबाव और बढ़ सकता है।
👉न्याय देने वाले अधिवक्ताओं को स्वयं चिकित्सा असुरक्षा में छोड़ देना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं कहा जा सकता।
No comments:
Post a Comment