**1. उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट):**
- 21 मार्च 2023 तक सुप्रीम कोर्ट में कोई रिक्त पद नहीं था। स्वीकृत संख्या 34 जजों की है, और सभी पद भरे हुए थे। हालांकि, यह स्थिति बदल सकती है यदि कोई जज सेवानिवृत्त होता है या अन्य कारणों से पद खाली होता है।
**2. उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट):**
- 1 जनवरी 2025 तक, देश के 25 उच्च न्यायालयों में स्वीकृत पदों की संख्या 1,114 थी, जिनमें से 327 पद रिक्त थे (लगभग 29.4%)। यानी, 787 जज कार्यरत थे।
- कुछ प्रमुख उच्च न्यायालयों में रिक्तियां इस प्रकार थीं:
- इलाहाबाद हाई कोर्ट: 66 रिक्त (सबसे अधिक)
- पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट: 30 रिक्त
- बॉम्बे हाई कोर्ट: 26 रिक्त
- गुजरात हाई कोर्ट: 20 रिक्त (29 नवंबर 2024 तक)
**3. जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय (निचली अदालतें):**
- 3 अगस्त 2023 तक, जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में स्वीकृत पदों की संख्या 25,246 थी, जिनमें से 5,388 पद रिक्त थे। उस समय 19,858 जज कार्यरत थे।
- नवंबर 2024 तक गुजरात जैसे राज्यों में 535 पद रिक्त थे, जो यह दर्शाता है कि रिक्तियों की समस्या राज्य स्तर पर भी गंभीर है।
- कुछ अनुमानों के अनुसार, 2025 तक यह संख्या थोड़ी कम हो सकती है यदि भर्ती प्रक्रिया तेज हुई, लेकिन अभी भी 5,000 से अधिक पद रिक्त होने की संभावना है।
**कुल अनुमान (मार्च 2025 तक):**
- सुप्रीम कोर्ट: 0 से 1 रिक्त (संभावित सेवानिवृत्ति के आधार पर)
- उच्च न्यायालय: लगभग 300-350 रिक्त
- निचली अदालतें: लगभग 5,000-5,500 रिक्त
- **कुल मिलाकर**: भारत में सभी स्तरों पर न्यायिक अधिकारियों के 5,300 से 6,000 पद रिक्त हो सकते हैं। यह संख्या सटीक नहीं है, क्योंकि यह दैनिक आधार पर बदलती है और नवीनतम भर्ती डेटा सार्वजनिक रूप से अद्यतन नहीं हो सकता।
**ध्यान दें:**
- रिक्तियों को भरने की जिम्मेदारी निचली अदालतों के लिए राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों की है, जबकि उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट के लिए यह प्रक्रिया कॉलेजियम और केंद्र सरकार के बीच समन्वय से होती है।
- यदि आपको किसी विशिष्ट राज्य या कोर्ट के लिए सटीक आंकड़े चाहिए, तो मैं उस आधार पर और जानकारी दे सकता हूँ। क्या आप कोई विशिष्ट क्षेत्र जानना चाहते हैं?