Sunday, 22 January 2012

Anshuman Dubey in Newspaper :-






















No comments:

Post a Comment

ज्वाला प्रसाद सिर्फ एक वकील नहीं थे, वे कचहरी की राजनीति के 'स्वघोषित बेताज बादशाह' भी थे:-

यह कहानी है एडवोकेट 'ज्वाला' प्रसाद की। नाम तो ज्वाला था, लेकिन उनका व्यक्तित्व घी और मलाई से बना था। उनकी तोंद इतनी विश...