वैष्णव जन तो तेने कहिये जे,
पीर परायी जाने रे।
पर दुख्खे उपकार करे तोये,
मन अभिमान ना आने रे।
~ नव वर्ष 2014 ~
~ आप सभी के लिए ~
~ मंगलकारी हो ~
धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज को बाँटकर चुनावी लाभ लेना लोकतांत्रिक राजनीति की स्वस्थ दिशा नहीं है, लेकिन यह समझना भी जरूरी है...
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