Friday, 9 August 2013

हम सबको मिलकर कुर्सी के कीड़ों से अपने भारत को बचाना है...!!!


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ज्वाला प्रसाद सिर्फ एक वकील नहीं थे, वे कचहरी की राजनीति के 'स्वघोषित बेताज बादशाह' भी थे:-

यह कहानी है एडवोकेट 'ज्वाला' प्रसाद की। नाम तो ज्वाला था, लेकिन उनका व्यक्तित्व घी और मलाई से बना था। उनकी तोंद इतनी विश...