पौराणिक साहित्य को ध्यान से देखें तो पाएंगे कि हमारे देवता भी सर्वथा निर्दोष या दुर्गुणों से मुक्त नहीं थे। लेकिन जहां उनका पतन हुआ, वहीं राक्षसों का जन्म हुआ। उन राक्षसों ने देवताओं को ही प्रताड़ित किया।
इन पाैराणिक कथाओं में मनुष्य के लिए संभवत: यही संदेश है। वह गलत वृत्तियों का शिकार हो सकता है। वही वृत्तियां हमारे समाज में राक्षस संस्कृति को जन्म देती हैं। और अंतत: मनुष्य को स्वयं ही उनका निदान या उपचार करना होता है।
इन बाताें काे यहां शेयर करने का तात्पर्य यह है कि, कुछ राक्षसी चरित्र के मनुष्य वर्तमान समय में तीव्र गति से विचरित हैं। जाे कुछ सज्जन/देवता व्यक्ति की गलत साेच का परिणाम हैं और उसका दण्ड सम्पूर्ण विद्वत समाज भाेग रहा है।
Friday, 27 November 2015
सज्जन व्यक्ति की गलत साेच का परिणाम :-
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