"समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये, किसी व्यक्ति का नहीं। क्योंकि अच्छा व्यक्ति भी गलत विचार रख सकता है और किसी बुरे व्यक्ति का भी, कोई विचार सही हो सकता है। अत: मत भेद कभी भी मन भेद नहीं बनने चाहिए...!!!"
आपका - अंशुमान दुबे
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धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज को बाँटकर चुनावी लाभ लेना लोकतांत्रिक राजनीति की स्वस्थ दिशा नहीं है, लेकिन यह समझना भी जरूरी है...
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