Sunday, 20 October 2013

काशी साईं फाउंडेशन के निवेदन पर जिलाधिकारी वाराणसी ने दिया टाउन हाल स्थित "भारत के राष्ट्रीय प्रतीक - अशोक स्तम्भ" के रख रखाव का आदेश :-

अंशुमान दुबे (अधिवक्ता) एवं सचिव, काशी साईं फाउंडेशन के अंशदान रुपये 2,100/- एवं निवेदन पत्र दिनांक 25-09-2013 पर जिलाधिकारी वाराणसी ने टाउन हाल स्थित "भारत के राष्ट्रीय प्रतीक - अशोक स्तम्भ" के सौन्द्रयीकरण, रख रखाव व साफ सफाई यथाशीघ्र कराने का आदेश दिनांक 19-10-2013 को नगर आयुक्त, नगर निगम, वाराणसी को दिया है। 
Web link:-


जिलाधिकारी वाराणसी का आदेश दिनांक 19-10-2013 

काशी साईं फाउंडेशन का निवेदन पत्र दिनांक 25-09-2013
टाउन हाल स्थित "भारत के राष्ट्रीय प्रतीक - अशोक स्तम्भ"

Sunday, 22 September 2013

भारत का राष्ट्रीय प्रतीक - अशोक स्तम्भ

 

भारत के राष्ट्रीय प्रतीक :-
भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ में अशोक के बौद्ध शेर राजधानी (अशोक स्तम्भ का उपरी) है। इसमें चार एशियाई शेर एक दूसरे के विपरीत दिशा में चारो दिशाओ की सुरक्षात्मक मुद्रा में है। सारनाथ भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में बनारस के पास है। भारत के प्रतीक के नीचे आदर्श वाक्य देवनागरी स्क्रिप्ट में “सत्यमेव जयते” उदित हैं – जिसका मतलब “सत्य की सदा ही जीत होती है”

The National Emblem of India:-
The Lion Capital of Ashoka at Sarnath is the National Emblem of India. It consists of four Asiatic Lions standing back to back on a circular abacus. The abacus has sculptures of an elephant, a horse, a bull and a lion. These are separated by wheels in between. The National Emblem stands on a full bloomed inverted lotus flower.





Sunday, 1 September 2013

Mera Satgur Ucha - Punjabi Devotional Bhajan


Wednesday, 14 August 2013

एक बार तिरंगे में लपेट दे - अंशुमान दुबे

माँ मेरा एक सपना पूरा कर दे,
मुझे भी एक बार "आज़ाद" सी मौत दे। 
माँ मेरा एक सपना पूरा कर दे,
मुझे भी एक बार "भारत" पर शहीद कर दे। 
माँ मेरा एक सपना पूरा कर दे,
मुझे भी एक बार "तिरंगे" में लपेट दे।
 माँ मेरा एक सपना पूरा कर दे,
अगर हो मेरी औलाद तो उसको भी मेरे जैसा कर दे।

सभी सम्मानित भारत वंशियो को और इस ब्लॉग के सुधी पाठकों को स्वतंत्रता दिवस - 2013 की हार्दिक शुभकामनाएं।

Saturday, 20 July 2013

आज के दिन : अंशुमान

खिला है, फूल चमन में हमारे, आज ही के दिन
महका है, चमन हमारा, आज ही के दिन।

हुआ है, सपना पूरा हमारा, आज ही के दिन
नम हुई हैं, आंखे हमारी, आज के ही दिन
क्योकि मिली है, सपने से हकीकत, आज ही के दिन।

ज़िंदगी की शुरुआत हुई है, आज ही के दिन
पाई है, मंजिल हमने, आज ही के दिन
दिया है, नाम नया प्यार को तुमने, आज ही के दिन
खिला है, फूल बनकर प्यार हमारा, आज ही के दिन
क्योकि मिली है, सपने से हकीकत, आज ही के दिन।

राम ने चूमा है, सीता का माथा, आज ही के दिन
कृष्ण ने थामा है, राधा का दामन, आज ही के दिन
मीरा हुई है, मगन श्याम के रंग, आज ही के दिन
क्योकि मिली है, सपने से हकीकत, आज ही के दिन।

प्यार के रंगों का एहसास मिला है हमको, आज ही के दिन
छुटा था जो दामन, थामा है फिर से उसको, आज ही के दिन
जुदा था जो, गले लगाया है उसको, आज ही के दिन
दर्द के एहसास को बनाया है, प्यार हमने, आज ही के दिन
क्योकि मिली है, सपने से हकीकत, आज ही के दिन

खिला है, फूल चमन में हमारे, आज ही के दिन
महका है, चमन हमारा, आज ही के दिन।


नोट: मैंने यह कविता अपने बेटे "Ashwath" (Aashi) के 03-05-2003 को पैदा होने के बाद दिनाक 04-05-2005 को लिखी थी, जिसमें सुधार "Anika" (Gauri) के 10-04-2011 को पैदा होने के बाद 01-12-2011 को पूनम के साथ  किया था।

अधिवक्ता हित में अंशुमान दुबे, अधिवक्ता का प्रस्ताव को समर्थन :-

वाराणसी न्यायलय परिसर स्थित दोनों बार संघों ने राज्य विधिज्ञ परिषद् उत्तर प्रदेश के प्रस्ताव का पर चर्चा करने के लिए दिनांक 19-07-2013 को एक संयुक्त बैठक दी बनारस बार के सभागार में आहूत की, जिसमें अंशुमान दुबे, अधिवक्ता ने अपने विचार रखे. 
 
दी बनारस बार के पत्र की प्रति :-

Web Link :-

धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज को बाँटकर चुनावी लाभ लेना - सही या ग़लत?

धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज को बाँटकर चुनावी लाभ लेना लोकतांत्रिक राजनीति की स्वस्थ दिशा नहीं है, लेकिन यह समझना भी जरूरी है...