परिवर्तन के दाैर में भारतीय समाज है आैर उसका असर राजनीति पर भी पड़ रहा है।
65% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, जाे काम चाहती है काेरे वादे नहीं, यह है 21वीं सदी का भारतीय लाेकतन्त्र।
सभी सत्ताधारी पार्टियों के नेताओं से सविनय निवेदन है कि कृपया काम करें आैर चुनावी वादाें काे पूरा करने का उचित प्रयास करें अन्यथा एक काे 60 साल के सत्ता के बदले शून्य (0) मिला है आैर दूसरे काे नाै माह की सत्ता पर तीन (3), वाह मेरे भारतीय भाइयाें आैर बहनाें आपने ताे साबरमती के संत जैसा कमाल कर दिया।
बनारसी अंदाज में कहूं ताे, "बा रजा दिल्ली बा, ऐके कहल जाला वाेट क चाेट, कुछ लाेग त सहरावे लायक भी नाही बचलन आैर कुछ लाेग बचल हुअन त खाली खुजावे खातिर। त्रिभुज बना के एक दूजे क खुजावा।"
Wednesday, 11 February 2015
परिवर्तन के दाैर में भारतीय समाज :-
Tuesday, 3 February 2015
कफ़न भी चन्दे से :-
No.1 - राेटी
No.2 - कपड़ा
No.3 - मकान
युवा व वृद्ध अधिवक्ता के लिए राेटी... व कपड़ा अति आवश्यक है। वह प्राप्त हाेगा Stipend आैर Pension से...
मकान (अधिवक्ता पुरम) ताे स्वाभाविक रूप से No. 3 पर है, यह अवश्य हाेना चाहिए परन्तु शर्त इतनी है, राेटी व कपड़े के बाद...!!!
मैं ताे उनकी बात कर रहा हूँ, जिनके मरने पर कफ़न भी चन्दे से आता है।
साथ में उनकी बात कर रहा हूँ जिन्होंने किसी दुर्घटना के कारण विकलांगता के बाद वकालत छाेड़ दी हाे आैर आजीविका काेई साधन न हाे।
साथ में उन युवाओं की बात कर रहा हूँ जाे आर्थिक कारणों से वकालत जैसे गरिमापूर्ण पेश काे छाेड़कर दूसरे राेजगार करने काे मजबूत हाेते हैं।
वकालत पेश में आज 15 से 20 प्रतिशत युवा आ रहे हैं जबकि वर्तमान में भारत की 65 प्रतिशत जनता 35 वर्ष से कम उम्र की हैं। यह विचारणीय है।
ना जनाब मैं आपकी बात नहीं कर रहा हूँ। मैं ताे उनकी बात कर रहा हूँ जिनके मरने पर कफ़न भी चन्दे से आता है।
प्रदेश सरकार (स.पा.) आैर केन्द्र सरकार (भा.ज.पा.) ने 2012 विधानसभा चुनाव में किया था पर कुछ नहीं किया।
बार काउंसिल व बार एसाेसिएशन संघर्ष कर रहें हैं आंदोलन की धमकी देकर कार्य विरत भी हाेते हैं आैर नहीं भी हाेते हैं।
सत्य के वास में कमी है। मुझमें आैर सबमें।
शायद मेरी मांगाें आैर विचाराें में दाेष हाे, पर मैं अपने विचार पर कायम हूँ आैर रहूंगा।
Saturday, 31 January 2015
Monday, 26 January 2015
Friday, 23 January 2015
Thursday, 1 January 2015
Tuesday, 2 December 2014
23 साल की वकालत का अनुभव: चेहरे बदलते रहे, व्यवस्था नहीं!
बार एसोसिएशन से बार काउंसिल तक—वादों, स्वार्थ और व्यवस्था के पतन का एक कटु अनुभव। वकालत करते हुए 23 वर्ष बीत गए। इस दौरान बार एसोसिएशन के अन...
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वशिष्ठ जी भगवान श्रीराम के वनवास प्रकरण पर भरत जी को समझाते हैं, इस अवसर पर बाबा तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस की एक चौपाई में...
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एक तर्क हमेशा दिया जाता है कि अगर बाबर ने राम मंदिर तोड़ा होता तो यह कैसे सम्भव होता कि महान रामभक्त और राम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलस...
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धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज को बाँटकर चुनावी लाभ लेना लोकतांत्रिक राजनीति की स्वस्थ दिशा नहीं है, लेकिन यह समझना भी जरूरी है...






