Friday, 23 October 2015

Vakil/Advocate in India :: भारत में वकील/एडवोकेट

Excellent secular court systems existed under the Mauryas (321-185 BCE) and the Mughals (16th – 19th centuries) with the latter giving way to the current common law system.

During the shift from Mughal legal system, the advocates under that regimen, “Vakil”, too followed suit, though they mostly continued their earlier role as client representatives.

During British rules the indian lawyers i.e. "Vakil" (वकील) are under the Legal Practitioners Act of 1846 which opened up the profession regardless of nationality or religion.

In Republic of India, the law relating to the Advocates is the "Advocates Act, 1961" introduced and thought up by Shri Ashok Kumar Sen, the then law minister of India, which is a law passed by the Parliament and is administered and enforced by the Bar Council of India.

Wednesday, 21 October 2015

अब मेरा दिल कोई मज़हब न मसीहा माँगे :-

अब मेरा दिल कोई मज़हब न मसीहा माँगे
ये तो बस प्यार से जीने का सलीका माँगे

ऐसी फ़सलों को उगाने की ज़रूरत क्या है
जो पनपने के लिए ख़ून का दरिया माँगें

सिर्फ़ ख़ुशियों में ही शामिल है ज़माना सारा
कौन है वो जो मेरे दर्द का हिस्सा माँगे

ज़ुल्म है, ज़हर है, नफ़रत है, जुनूँ है हर सू
ज़िन्दगी मुझसे कोई प्यार का रिश्ता माँगे

ये तआलुक है कि सौदा है या क्या है आख़र
लोग हर जश्न पे मेहमान से पैसा माँगें

कितना लाज़म है मुहब्बत में सलीका ऐ‘अज़ीज़’
ये ग़ज़ल जैसा कोई नर्म-सा लहज़ा माँगे

********* इस सुंदर रचना के लिए जनाब अज़ीज़ आज़ाद जी काे काेटिशः धन्यवाद।

Tuesday, 15 September 2015

सूचना का अधिकार ने आम लोगों को मजबूत और जागरूक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है:- 

सूचना का अधिकार अधिनियम - 2005 (आई.टी.आई.) ने हम लाेगाें और आम लोगों को मजबूत और जागरूक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। यह कानून देश में 2005 में लागू हुआ। इस कानून का उपयोग करके आप किसी भी विभाग या सरकारी महकमे से संबंधित अपने काम की जानकारी पा सकते हैं। लेकिन आज हम आपको इसके बारे में कुछ रोचक जानकारी देने जा रहे हैं।

आई.टी.आई. से आप सरकार से कोई भी सवाल पूछ सकते हैं। किसी भी दस्तावेज की जांच कर सकते हैं। आर.टी.आई. से आप दस्तावेज या डाक्यूमेंट्स की प्रमाणित कॉपी ले सकते हैं। सरकारी कामकाज में इस्तेमाल सामग्री का नमूना भी ले सकते हैं। 

कुछ लोगों का सवाल आया है कि, आर.टी.आई. में कौन-कौन सी धारा हमारे काम की हैं? 
तो वो इस प्रकार है-
धारा 6 (1)- आर.टी.आई. का ऐप्लीकेशन लिखने की धारा।
धारा 6 (3)- अगर आपका ऐप्लीकेशन गलत विभाग मे चला गया है तो गलत विभाग इसको 6 (3) धारा के अंतर्गत सही विभाग में 5
दिन के अंदर भेज देगा।
धारा 7(5)- इस धारा के अनुसार BPL कार्ड वालों को कोई आरटीआई शुल्क नहीं देना होता।
धारा 7 (6)- इस धारा के अनुसार अगर आरटीआई का जवाब 30 दिन में नहीं आता है तो सूचना फ्री में दी जाएगी।
धारा 18- अगर कोई अधिकारी जवाब नहीं देता तो उस की शिकायत सूचना अधिकारी को दी जाये।
धारा 8- इस के अनुसार वो सूचना आर.टी.आई. में नहीं दी जाएगी, जो देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हो या विभाग की आंतरिक जांच को प्रभावित करती हो।
धारा 19 (1)- अगर आपकी आर.टी.आई. का जवाब 30 दिन में नही आता है तो इस धारा के अनुसार आप प्रथम अपील अधिकारी को प्रथम अपील कर सकते हो।
धारा 19 (3)- अगर आपकी प्रथम अपील का भी जवाब नहीं आता है तो आप इस धारा की मदद से 90 दिन के अंदर दूसरी अपील अधिकारी को अपील कर सकते हैं। 
इसके लिए आप एक सादा पेपर लें और उसमें एक इंच की कोने से जगह छोड़े और नीचे दिए गए प्रारूप में अपने आरटीआई लिख लें-
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सूचना का अधिकार 2005 की धारा 6(1) और 6(3) के अंतर्गत आवेदन :-
सेवा में
(अधिकारी का पद)
जन सूचना अधिकारी---------------
विभाग का नाम-------------------
विषय - आर.टी.आई. एक्ट-2005 के अंतर्गत .................. से संबधित सूचनाएं
1- अपने सवाल यहां लिखें-
2-
3-
4-
मैं आवेदन फीस के रूप में 10 रुका पोस्टल ऑर्डर ........ संख्या अलग से जमा कर रहा / रही हूं या मैं बी.पी.एल. कार्ड धारी हूं इसलिए सभी देय शुल्कों से मुक्त हूं। मेरा बी.पी.एल. कार्ड नं..............है।
यदि मांगी गई सूचना आपके विभाग/ कार्यालय से सम्बंधित नहीं हो तो सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6 (3) का संज्ञान लेते हुए। मेरा आवेदन सम्बंधित लोक सूचना अधिकारी को पांच दिनों के समयाविध् के अन्तर्गत हस्तान्तरित करें। साथ ही अधिनियम के प्रावधानों के तहत सूचना उपलब्ध् कराते समय प्रथम अपील अधिकारी का नाम व पता अवश्य बतायें।
भवदीय:
नाम:
पता:
फोन नं:
.............................................
ये सब लिखने के बाद अपना हस्ताक्षर करें। अब मित्रो केंद्र से सूचना मांगने के लिए आप 10 रुपया और एक पेपर की कॉपी मांगने के 2 रु देते है और हर राज्य का आरटीआई शुल्क अगल-अलग है। जिसका पता आप कर सकते हैं।

Wednesday, 9 September 2015

प्रदेश सरकार द्वारा मृत अधिवक्ताओं के परिजनों काे 12.09.2015 काे 5 लाख की सहायता राशि दी जायेगी:-

यह ताे अच्छी पहल है, जिसे काफी संघर्ष और बलिदान के बाद हम अधिवक्ताओं ने प्राप्त किया है। आश्चर्य की बात यह है कि, सिर्फ 17 लाेगाें काे चेक दिया जायेगा। जबकि 20 कराेड़ रूपये इस कार्य के लिए आबंटित है। अर्थात 400 मृत अधिवक्ताओं के परिजन लाभान्वित हाे सकते हैं।
ताे फिर सिर्फ 17 क्याें...??? यह बार काउंसिल के सदस्याें व महाधिवक्ता काे स्पष्ट करना चाहिए।
क्या वाराणसी के किसी मृत अधिवक्ता के परिजन काे भी 5 लाख का चेक मिल रहा है...???
यह प्रश्न इसलिए क्योंकि वाराणसी से तीन सदस्य बार काउंसिल अॉफ उत्तर प्रदेश में हैं और वे मृतक अधिवक्ताओं के प्रति जवाबदेह भी माने जा सकते हैं, यदि वे ऐसा समझते हाे ताे।

Sunday, 30 August 2015

क्या होता है श्रावणी उपाकर्म (रक्षाबंधन) ये क्यों किया जाता है, जानिए :-

रक्षाबंधन (29 अगस्त 2015, शनिवार) के दिन ब्राह्मणों द्वारा श्रावणी उपाकर्म किए जाने का विधान है। यह क्रिया पवित्र नदी के घाट पर सामूहिक रूप से की जाती है। जानिए क्या है श्रावणी उपाकर्म-
श्रावणी उपाकर्म के तीन पक्ष है- प्रायश्चित संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय। सर्वप्रथम होता है- प्रायश्चित रूप में हेमाद्रि स्नान संकल्प। गुरु के सान्निध्य में ब्रह्मचारी गाय के दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र तथा पवित्र कुशा से स्नानकर वर्षभर में जाने-अनजाने में हुए पापकर्मों का प्रायश्चित कर जीवन को सकारात्मकता से भरते हैं। स्नान के बाद ऋषिपूजन, सूर्योपस्थान एवं यज्ञोपवीत पूजन तथा नवीन यज्ञोपवीत धारण करते हैं। 
यज्ञोपवीत या जनेऊ आत्म संयम का संस्कार है। आज के दिन जिनका यज्ञोपवित संस्कार हो चुका होता है, वह पुराना यज्ञोपवित उतारकर नया धारण करते हैं और पुराने यज्ञोपवित का पूजन भी करते हैं । इस संस्कार से व्यक्ति का दूसरा जन्म हुआ माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति आत्म संयमी है, वही संस्कार से दूसरा जन्म पाता है और द्विज कहलाता है।
उपाकर्म का तीसरा पक्ष स्वाध्याय का है। इसकी शुरुआत सावित्री, ब्रह्मा, श्रद्धा, मेधा, प्रज्ञा, स्मृति, सदसस्पति, अनुमति, छंद और ऋषि को घी की आहुति से होती है। जौ के आटे में दही मिलाकर ऋग्वेद के मंत्रों से आहुतियां दी जाती हैं। इस यज्ञ के बाद वेद-वेदांग का अध्ययन आरंभ होता है।  इस प्रकार वैदिक परंपरा में वैदिक शिक्षा साढ़े पांच या साढ़े छह मास तक चलती है। वर्तमान में श्रावणी पूर्णिमा के दिन ही उपाकर्म और उत्सर्ग दोनों विधान कर दिए जाते हैं। प्रतीक रूप में किया जाने वाला यह विधान हमें स्वाध्याय और सुसंस्कारों के विकास के लिए प्रेरित करता है।

हमेशा सफल होने के लिए अपनाएं चाणक्य की ये दस बातें :-

चाणक्य की बुद्धि के कारण ही उन्हें आज जाना जाता है। एक महान अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाने वाले चाणक्य ने कई ऐसी नीतियां बनाईं थी। जिसे अपना कर आप सफलता के शिखर पर पहुंच सकते हैं। आज हम बताने जा रहे है चाणक्य की ऐसी ही दस बातें जिन पर अमल कर आप अपना जीवन सफल बना सकते हैं...!!!

1- शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पता है। शिक्षा सौंदर्य और यौवन को परास्त कर देती है।
2- अपने रहस्यों को किसी पर भी उजागर मत करो। यह आदत आपको बर्बाद कर सकती है।
3- हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है। ऐसी कोई मित्रता नहीं जिसमें स्वार्थ ना हो। यह कड़वा सच है।
4- हमें भूत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, ना ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए। विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं।
5- कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयं से तीन प्रश्न जरुर कीजिये - मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल हो पाऊगां? और जब गहरई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, तभी आगे बढें।
6- कोई व्यक्ति अपने कर्मों से महान होता है, अपने जन्म से नहीं।
7- भगवान मूर्तियों में नहीं है। आपकी अनुभूति आपका ईश्वर है। आपकी आत्मा आपका मंदिर है।
8- जैसे ही भय आपके करीब आये , उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिये।
9- एक बार जब आप कोई काम शुरु करते हैं, तो असफलता से डरे नहीं और ना ही उसे त्‍यागें। ईमानदारी से काम करने वाले लोग खुश रहते हैं।
10- फूल की खुशबू केवल हवा की दिशा में जाएगी। लेकिन एक अच्‍छे इंसान की अच्‍छाई सब जगह फैलेगी।

Saturday, 15 August 2015

चंदे से हाेता है इलाज...!!!

चंदे से हाेता है इलाज..... यह है अधिवक्ता की कहानी।

शर्म आती है मुझकाे अधिवक्ता के रूप में अपनी अक्षमता पर।

क्या हमारे बार एसोसिएशन व बार काउंसिल के पदाधिकारियों काे भी शर्म आती है...???

नाेट:- मैं बात कर रहा हूँ, अधिवक्ता चन्द्र माेहन गुप्ता जी की, जाे कबीरचाैरा मंडलीय अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं। जरनल वार्ड नं. 1 बेड नं. 16 कृपया मदद करें।

सही है कि Adv Gupta jee के पास व साथ कचहरी का वाेट बैंक नहीं है और इससे  भी बड़ी दुर्भाग्य की बात है कि, उनके तीन पुत्र हैं। जाे इलाज में सहयाेग नहीं कर रहे हैं। यदि सही इलाज नहीं हुआ ताे वे अपंग भी हाे सकते हैं अन्यथा.....।

श्री चन्द्रमाेहन गुप्ता एडवोकेट का परिचय-पत्र।और दुर्गा प्रसाद, एड. द्वारा प्रदत्त चित्र, जिसमें श्री चन्द्रमाेहन जी अपनी पत्नी के साथ अस्पताल में। 

23 साल की वकालत का अनुभव: चेहरे बदलते रहे, व्यवस्था नहीं!

बार एसोसिएशन से बार काउंसिल तक—वादों, स्वार्थ और व्यवस्था के पतन का एक कटु अनुभव। वकालत करते हुए 23 वर्ष बीत गए। इस दौरान बार एसोसिएशन के अन...