Thursday, 27 February 2014
Monday, 24 February 2014
हम सब क सब हमार... स्व. बाबू सागर सिंह (अधिवक्ता)
जब-जब सामुहिक हित के ऊपर व्यक्तिगत हित हावी होगा,
तब-तब विचारों एवं भाषा में दोष पैदा होगा॥
"हम सब क सब हमार..."
स्व. बाबू सागर सिंह (अधिवक्ता)
समाजवाद की यह परिभाषा स्व. बाबू सागर सिंह (अधिवक्ता) ने अपनी मृत्यु दिनांक २४-०२-२००८ की पूर्व संध्या पर अपने भतीजे श्री विनोद सिंह (अधिवक्ता) के सम्मुख प्रकट किया था।
समाजवाद की यह लघु परिभाषा आज के सभी समाजवादी शायद भूल चुके है। तभी तो समाजवादी विचार धारा अब प्रासंगिक नहीं है।
Saturday, 22 February 2014
हरिवंशराय जी की महान प्रेरणा दायक रचना...!!!
लहरों से डर कर
नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की
कभी हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब
दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर,
सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास
रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना,
गिरकर चढ़ना
न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत
बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की
कभी हार नहीं होती।
डुबकियां सिंधु में
गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ
लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही
मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह
इसी हैरानी में.....।
मुट्ठी उसकी खाली
हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की
कभी हार नहीं होती।
असफलता एक चुनौती है,
इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई,
देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो,
नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर
मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही
जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की
कभी हार नहीं होती।
--हरिवंशराय बच्चन
Wednesday, 12 February 2014
सावधान भारत सावधान...!!! चुनाव सिर पर हैं...!!!
संत कबीर ने इस सत्य को कई सदी पूर्व अपनी एक रचना में कह दिया था, संत कबीर की उस रचना का शीर्षक है "साधो, देखो जग बौराना"।
साँची कही तो मारन धावै, झूठे जग पतियाना ।
हिन्दू कहत, राम हमारा, मुसलमान रहमाना ।
आपस में दौऊ लड़ै मरत हैं, मरम कोई नहिं जाना ।
बहुत मिले मोहि नेमी, धर्मी, प्रात करे असनाना ।
आतम-छाँड़ि पषानै पूजै, तिनका थोथा ज्ञाना ।
आसन मारि डिंभ धरि बैठे, मन में बहुत गुमाना ।
पीपर-पाथर पूजन लागे, तीरथ-बरत भुलाना ।
माला पहिरे, टोपी पहिरे छाप-तिलक अनुमाना ।
साखी सब्दै गावत भूले, आतम खबर न जाना ।
घर-घर मंत्र जो देन फिरत हैं, माया के अभिमाना ।
गुरुवा सहित सिष्य सब बूढ़े, अन्तकाल पछिताना ।
बहुतक देखे पीर-औलिया, पढ़ै किताब-कुराना ।
करै मुरीद, कबर बतलावैं, उनहूँ खुदा न जाना ।
हिन्दू की दया, मेहर तुरकन की, दोनों घर से भागी ।
वह करै जिबह, वो झटका मारे, आग दोऊ घर लागी ।
या विधि हँसत चलत है, हमको आप कहावै स्याना ।
कहै कबीर सुनो भाई साधो, इनमें कौन दिवाना ।
Friday, 31 January 2014
बाबा राम ~ "Baba Ram" by Anshuman Dubey
बाबा राम, बाबा राम।
बाबा राम तारन हार॥
बाबा राम, बाबा राम।
बाबा राम साचो नाम॥
बाबा राम, बाबा राम।
बाबा राम पालन हार॥
बाबा राम, बाबा राम।
बाबा राम प्यारो नाम॥
बाबा राम, बाबा राम।
बाबा राम तुझसे शुरू॥
बाबा राम, बाबा राम।
बाबा राम तुझपे खत्म॥
बाबा राम, बाबा राम।
बाबा राम जीवन तमाम॥
बाबा राम, बाबा राम,।
बाबा राम बनाये काम॥
बाबा राम, बाबा राम।
बाबा राम महादेव राम॥
बाबा राम, बाबा राम......
Friday, 17 January 2014
Happy Republic Day ~ 2014
Of The Republic Day, And Remember
The Selfless Sacrifice Of Many Indians Before Us.
Let Us Unite Again
To Remember The Glorious Moment
Of Our Republic Day And
Relive The Sacrifice Of
Our Freedom Fighters
Happy Republic Day ~ 2014
Wednesday, 1 January 2014
नव वर्ष 2014 आप सभी के लिए मंगलकारी हो ॥ New Year 2014 Wishes
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे,
पीर परायी जाने रे।
पर दुख्खे उपकार करे तोये,
मन अभिमान ना आने रे।
One
who is a Vaishnav (Devotee of God)
Knows the pain of others
Does good to others
without letting pride enter his mind.
New Year Wishes
to All friends with
Lots of Humanity
धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज को बाँटकर चुनावी लाभ लेना - सही या ग़लत?
धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज को बाँटकर चुनावी लाभ लेना लोकतांत्रिक राजनीति की स्वस्थ दिशा नहीं है, लेकिन यह समझना भी जरूरी है...
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वशिष्ठ जी भगवान श्रीराम के वनवास प्रकरण पर भरत जी को समझाते हैं, इस अवसर पर बाबा तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस की एक चौपाई में...
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एक तर्क हमेशा दिया जाता है कि अगर बाबर ने राम मंदिर तोड़ा होता तो यह कैसे सम्भव होता कि महान रामभक्त और राम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलस...
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उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए व्यापक मेडिक्लेम/हेल्थ इंश्योरेंस योजना का मुद्दा पिछले दो वर्षों में गंभीर रूप से उभरा है। य...

