Wednesday, 24 June 2015

देश भर में पत्रकाराें पर हमला व हत्या चिन्ता का विषय है :-

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया टीआरपी और विज्ञापन से हाेने वाले मुनाफ़े में व्यस्त है। प्रिंट मीडिया भी अब टीवी और सोशल मीडिया पर निर्भर हो चुका है। उसकी हालत भी उन जैसी ही हो चुकी है। प्रिंट में छपे निजी या सरकारी विज्ञापनों में समाचारों काे तलाश करने के बाद पढ़ने माैका मिलता है।
ऐसे में पत्रकारों व समाचार कर्मियाें की सुरक्षा कैसे सम्भव है...???
पत्रकारिता पूर्व में समाज सेवा की श्रेणी में आती थी। परन्तु 21वीं सदी नें पत्रकारिता अब व्यापार हाे चुका है। अभी समाज सेवा की भावना रखने वाले कुछ पत्रकार जीवित हैं पर इनकी हत्या हाे रही है, पूरे भारत में। सुरक्षा के आभाव में पत्रकारिता की मृत्यु हाे जायेगी।

Monday, 8 June 2015

गाे-दान नहीं, नेत्रदान :-

कल दिनांक 06.06.2015 काे मेरे परिवार (माँ, पापा, मैं और पत्नी) ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि, परिवार के किसी भी सदस्य की मृत्यु पर हमारा परिवार गाे-दान अथवा अन्य नहीं करेगा। बल्कि हमसब "नेत्र-दान" करेंगे।
#DonateEye
#नेत्रदान

Thursday, 28 May 2015

Saturday, 23 May 2015

"क्या हुआ तेरा वादा":-

अधिवक्ता कल्याण की योजनाएं- युवा अधिवक्ताआें काे भत्ता, 5 लाख का बीमा एवं पेंशन कब तक उत्तर प्रदेश सरकार व बार काउंसिल अॉफ उत्तर प्रदेश के मध्य विचार और क्रियान्वयन के आश्वासन में फंसी रहेंगी...???
2011-12 के चुनाव में स.पा. एवं बार के सदस्याें ने इन याेजनाओं काे लागू करने का वादा किया था।
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यहां एक गाना याद आया, "क्या हुआ तेरा वादा"
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जहां तक मुझे पता है, वर्तमान में बार काउंसिल के 25 में से ज्यादातर स.पा. से किसी ना किसी रूप में जुड़े हैं अथवा लाभान्वित हैं।
सविनय निवेदन है कि कुछ लाभ हम वाेटराें काे भी उपलब्ध करायें, उपराेक्त याेजनाओं के द्वारा।
नाेट:- अगर मेरी उपरोक्त बातें अवमानना की श्रेणी में आती हाे ताे, मैं समग्र अधिवक्ता हित में अवमानना की कार्यवाही काे सह्रदय तैयार हूँ।
सभी मित्राें का धन्यवाद के साथ निवेदन है कि उक्त याेजनाओं के लागू हाेने में हाे रहे विलम्ब पर अपने विचार दें।
समझ के परे है यह विलम्ब...???

Thursday, 14 May 2015

गुरू काे समर्पित - 3

हमारे एक पिया प्यारा है,
घट घट में उसी का नूर है।
हिन्दू मुस्लिम से भी प्यारा है,
जात पात से भी प्यारा है।
आवे न जावे, मरे ना जीवे,
हमारे एक पिया प्यारा है।

गुरू काे समर्पित - 2

तैरती लाश काे देखकर हमने ये जाना,
वज़न ताे सांसाें में था, जिस्म में नहीं।

गुरू काे समर्पित - 1

परम पिता परमेश्वर व प्रकृति ने मानव में सिर्फ दाे जाति बनायी और वह है "पुरूष" व "स्त्री" और हम मूर्ख मानवाें ने पता नहीं क्या-क्या बना डाला।

23 साल की वकालत का अनुभव: चेहरे बदलते रहे, व्यवस्था नहीं!

बार एसोसिएशन से बार काउंसिल तक—वादों, स्वार्थ और व्यवस्था के पतन का एक कटु अनुभव। वकालत करते हुए 23 वर्ष बीत गए। इस दौरान बार एसोसिएशन के अन...