Thursday, 28 May 2015
Saturday, 23 May 2015
"क्या हुआ तेरा वादा":-
अधिवक्ता कल्याण की योजनाएं- युवा अधिवक्ताआें काे भत्ता, 5 लाख का बीमा एवं पेंशन कब तक उत्तर प्रदेश सरकार व बार काउंसिल अॉफ उत्तर प्रदेश के मध्य विचार और क्रियान्वयन के आश्वासन में फंसी रहेंगी...???
2011-12 के चुनाव में स.पा. एवं बार के सदस्याें ने इन याेजनाओं काे लागू करने का वादा किया था।
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यहां एक गाना याद आया, "क्या हुआ तेरा वादा"
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जहां तक मुझे पता है, वर्तमान में बार काउंसिल के 25 में से ज्यादातर स.पा. से किसी ना किसी रूप में जुड़े हैं अथवा लाभान्वित हैं।
सविनय निवेदन है कि कुछ लाभ हम वाेटराें काे भी उपलब्ध करायें, उपराेक्त याेजनाओं के द्वारा।
नाेट:- अगर मेरी उपरोक्त बातें अवमानना की श्रेणी में आती हाे ताे, मैं समग्र अधिवक्ता हित में अवमानना की कार्यवाही काे सह्रदय तैयार हूँ।
सभी मित्राें का धन्यवाद के साथ निवेदन है कि उक्त याेजनाओं के लागू हाेने में हाे रहे विलम्ब पर अपने विचार दें।
समझ के परे है यह विलम्ब...???
Thursday, 14 May 2015
गुरू काे समर्पित - 3
हमारे एक पिया प्यारा है,
घट घट में उसी का नूर है।
हिन्दू मुस्लिम से भी प्यारा है,
जात पात से भी प्यारा है।
आवे न जावे, मरे ना जीवे,
हमारे एक पिया प्यारा है।
गुरू काे समर्पित - 1
परम पिता परमेश्वर व प्रकृति ने मानव में सिर्फ दाे जाति बनायी और वह है "पुरूष" व "स्त्री" और हम मूर्ख मानवाें ने पता नहीं क्या-क्या बना डाला।
Tuesday, 12 May 2015
"मैं ही श्रेष्ठ" क्या यह सही है...???
"मैं ही श्रेष्ठ" की भावना हावी हाेना, अधिवक्ता एकता के लिए घातक है। सरकार, न्यायपालिका, अधिकारी सभी अधिवक्ताआें की एकता ताेड़ने के प्रयास में हैं और कहीं कहीं वे सफलता भी पा रहें हैं। उदाहरण- उत्तर प्रदेश के 34 जिलाें में लागू प्रातःकालीन न्यायालय की व्यवस्था समाप्त हाेना इसका प्रमाण है।
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।
Sunday, 10 May 2015
वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है :- दुष्यंत कुमार
वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है
वे कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तगू
मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है
सामान कुछ नहीं है फटेहाल है मगर
झोले में उसके पास कोई संविधान है
उस सिरफिरे को यों नहीं बहला सकेंगे आप
वो आदमी नया है मगर सावधान है
फिसले जो इस जगह तो लुढ़कते चले गए
हमको पता नहीं था कि इतना ढलान है
देखे हैं हमने दौर कई अब ख़बर नहीं
पैरों तले ज़मीन है या आसमान है
वो आदमी मिला था मुझे उसकी बात से
ऐसा लगा कि वो भी बहुत बेज़ुबान है
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Monday, 4 May 2015
कौन किसका मालिक:-
एक राेज़ सूफ़ी संत 'शेख़ फरीद' अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। तभी एक आदमी वहां से एक गाय को ज़बरदस्ती खींचता हुआ निकला।
यह देखकर फरीद ने अपने शिष्यों से पूछा, "तुम्हारे विचार में कौन किससे बंधा है?"
उनकेे शिष्यों ने जवाब दिया कि स्पष्ट है, गाय ही उस आदमी से बंधी है।
फरीद ने फिर पूछा, "अच्छा यह बताओ, कौन किसका मालिक है?"
सब शिष्य इस अजीब से प्रश्न पर हंसने लगे और बोले कि वह आदमी ही मालिक था और कौन? गाय तो पशु है, वह मनुष्य कि स्वामिनी कैसे हो सकती है?"
"अच्छा, यह बताओ कि अग़र रस्सी को तोड़ दिया जाय तो क्या होगा?" फरीद ने पूछा।
शिष्यों ने उत्तर दिया, "तब तो गाय भागने की कोशिश करेगी।"
"और फिर उस आदमी का क्या होगा?" फरीद ने पूछा।
"स्पष्ट रूप से तब तो यह आदमी गाय का पीछा करेगा और गाय के पीछे-पीछे भागेगा।" तुरंत जवाब आया।
जैसे ही शिष्यों ने यह जवाब दिया, वे समझ गए कि कौन किससे बंधा है?
आज यदि हम सोचें कि आज के परपेक्ष्य में हम लोग कार, स्कूटर, बाइक, लैपटॉप, कम्पूटर, डीवीडी, मोबाईल, टीवी इत्यादि भोग विलास की वस्तुओं के मालिक हैं या यह भोग विलास की वस्तुएं हमारी मालिक हैं?
हम इन वस्तुओं का उपयोग अपने लाभ के लिए ही कर रहे हैं या इन वस्तुओं के कारण हमारा नुकसान हो रहा है?
कहीं ऐसा तो नहीं कि हम इन वस्तुओं के इतने अधिक आदी हो चुके हैं कि हम अपने कर्तव्यों का निर्वाह ठीक से नहीं कर पा रहे?
हमें यह समझना होगा कि हमें इन भोग विलास के साधनों का उपयोग अपने गुलाम के रूप में करना है और किसी भी कीमत पर इनका गुलाम नहीं बनना है।
कबीर कहिन, सुनत सब पर मानत नाहि:-
साँप के दाँत में विष रहता है, मक्खी के सिर में और बिच्छू की पूँछ में किंतु दुर्जन के पूरे शरीर में विष रहता है। - कबीर
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कष्ट पड़ने पर भी साधु पुरुष मलिन नहीं होते, जैसे सोने को जितना तपाया जाता है वह उतना ही निखरता है। - कबीर
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जिस तरह जौहरी ही असली हीरे की पहचान कर सकता है, उसी तरह गुणी ही गुणवान् की पहचान कर सकता है। – कबीर
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माया मरी न मन मरा, मर मर गये शरीर। आशा तृष्णा ना मरी, कह गये दास कबीर॥ - कबीर
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कबिरा आप ठगाइये, और न ठगिये कोय। आप ठगे सुख होत है, और ठगे दुख होय॥ - कबीर
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यदि सदगुरु मिल जाये तो जानो सब मिल गया, फिर कुछ मिलना शेष नहीं रहा। यदि सदगुरु नहीं मिले तो समझों कोई नहीं मिला, क्योंकि माता-पिता, पुत्र और भाई तो घर-घर में होते हैं। ये सांसारिक नाते सभी को सुलभ है, परन्तु सदगुरु की प्राप्ति दुर्लभ है। - कबीरदास
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केवल ज्ञान की कथनी से क्या होता है, आचरण में, स्थिरता नहीं है, जैसे काग़ज़ का महल देखते ही गिर पड़ता है, वैसे आचरण रहित मनुष्य शीघ्र पतित होता है। - कबीर
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खेत और बीज उत्तम हो तो भी, किसानों के बोने में मुट्ठी के अंतर से बीज कहीं ज्यादा कहीं कम पड़ते हैं, इसी प्रकार शिष्य उत्तम होने पर भी गुरुओं की भिन्न-भिन्न शैली होने पर भी शिष्यों को कम ज्ञान हुआ तो इसमें शिष्यों का क्या दोष। - संत कबीर
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जब आपका जन्म हुआ तो आप रोए और जग हंसा था. अपने जीवन को इस प्रकार से जीएं कि जब आप की मृत्यु हो तो दुनिया रोए और आप हंसें। - कबीर
प्रधानमंत्री जी की पार्टी वाले ताे समझे:-
यदि घाटाें काे साफ करने के कार्य काे चुनाव में टिकट पाने का पैमाना बना दिया जायें, ताे हर घाट पर सिर्फ एक ही पार्टी के लाेग दल-बल के साथ रियाज़ करते हुये पायें जायेंगे।
जय हाे गंगा मइया की।
पहले प्रधानमंत्री जी की पार्टी वाले ताे समझे कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता पर इतना ज़ाेर क्याें दिया है। हमारे प्रधानमंत्री जी ताे समझ गये हैं, इसीलिए उन्होंने 2 अक्टूबर काे स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की है। परन्तु अभी पार्टी के लाेगाें यह समझ में नहीं आ रहा। वे साेचते हैं कि यह अभियान भी माेदी जी का प्रचार अभियान मात्र है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में रविवार को गंगा घाटों की सफाई का भाजपा का तीन घंटे का महाअभियान दो घंटे में ही खत्म हो गया। इस दौरान चमके घाटों की ही सफाई की रस्म अदायगी नजर आई।
अभियान में दस हजार सदस्यों के शामिल होने का दावा किया गया था, दिखे हजार भी नहीं।
झाड़ू लगाने के बाद कूड़े को काली पालीथिन बैग में भरकर निस्तारित किया गया। हालांकि, निस्तारण कार्य में घोर लापरवाही बरती गई। घाटों पर ही कूड़े की पालीथिन छोड़ लोग चलते बने। कुछ घाटों पर कूड़े में आग भी लगा दी गई। वहां से राख हटाना अब नगर निगम की जिम्मे है।
Sunday, 3 May 2015
माेदी जी काे धन्यवाद क्योंकि उनके प्रयास से 10000 साेये भा.ज.पा वालाें ने झांडू उठाया है:-
तमाम विभाग हम बनारसी लाेगाें पर आराेप लगाते हैं यहां की जनता ही सफाई पसंद नहीं हैं।
अरे मेरे बाहरी अधिकारीगण, बाहरी नेतागण व सांसद महाेदय बनारस काे समझना है ताे कबीर बनाे, रैदास बनाे तुलसी बनाे तब बनारस समझ में आयेगा।
Saturday, 2 May 2015
एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 40: आदेश पर रोक (Stay of Order)
एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 40: आदेश पर रोक (Stay of Order) यह प्रावधान एक अधिवक्ता के विरुद्ध अनुशासनात्मक समिति (Disciplinary Committee) ...
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वशिष्ठ जी भगवान श्रीराम के वनवास प्रकरण पर भरत जी को समझाते हैं, इस अवसर पर बाबा तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस की एक चौपाई में...
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एक तर्क हमेशा दिया जाता है कि अगर बाबर ने राम मंदिर तोड़ा होता तो यह कैसे सम्भव होता कि महान रामभक्त और राम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलस...
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Happy New Year - 2015 नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं New year Wishes ॥ नव वर्ष मंगलमय हो Keep the smile, leave the tear, Thin...
