Sunday, 10 May 2015

वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है :- दुष्यंत कुमार

वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है

वे कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तगू
मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है

सामान कुछ नहीं है फटेहाल है मगर
झोले में उसके पास कोई संविधान है

उस सिरफिरे को यों नहीं बहला सकेंगे आप
वो आदमी नया है मगर सावधान है

फिसले जो इस जगह तो लुढ़कते चले गए
हमको पता नहीं था कि इतना ढलान है

देखे हैं हमने दौर कई अब ख़बर नहीं
पैरों तले ज़मीन है या आसमान है

वो आदमी मिला था मुझे उसकी बात से
ऐसा लगा कि वो भी बहुत बेज़ुबान है
~ * ~

No comments:

Post a Comment

भारत में “Advocates Protection Act” : आवश्यकता, वर्तमान स्थिति और आगे की राह (सम्पादकीय लेख)

भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका की मजबूती केवल न्यायाधीशों पर ही नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं (Advocates) पर भी समान रूप से निर्भर...