Tuesday, 12 May 2015

"मैं ही श्रेष्ठ" क्या यह सही है...???

"मैं ही श्रेष्ठ" की भावना हावी हाेना, अधिवक्ता एकता के लिए घातक है। सरकार, न्यायपालिका, अधिकारी सभी अधिवक्ताआें की एकता ताेड़ने के प्रयास में हैं और कहीं कहीं वे सफलता भी पा रहें हैं। उदाहरण- उत्तर प्रदेश के 34 जिलाें में लागू प्रातःकालीन न्यायालय की व्यवस्था समाप्त हाेना इसका प्रमाण है।

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।

No comments:

Post a Comment

उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए मेडिक्लेम योजना: न्यायपालिका की पहल बनाम सरकारों और बार संस्थाओं की जिम्मेदारी - अंशुमान दुबे (एडवोकेट/रिपोर्टर)

उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए व्यापक मेडिक्लेम/हेल्थ इंश्योरेंस योजना का मुद्दा पिछले दो वर्षों में गंभीर रूप से उभरा है। य...