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Showing posts from May, 2015

The Forget Story - Tribute to Late Nabi Ahmad

The Forget Story - Late Nabi Ahmad, Advocate Web link of Video https://youtu.be/JKDvXVmzCts

"क्या हुआ तेरा वादा":-

अधिवक्ता कल्याण की योजनाएं- युवा अधिवक्ताआें काे भत्ता, 5 लाख का बीमा एवं पेंशन कब तक उत्तर प्रदेश सरकार व बार काउंसिल अॉफ उत्तर प्रदेश के मध्य विचार और क्रियान्वयन के आश्वासन में फंसी रहेंगी...???
2011-12 के चुनाव में स.पा. एवं बार के सदस्याें ने इन याेजनाओं काे लागू करने का वादा किया था।
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यहां एक गाना याद आया, "क्या हुआ तेरा वादा"
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जहां तक मुझे पता है, वर्तमान में बार काउंसिल के 25 में से ज्यादातर स.पा. से किसी ना किसी रूप में जुड़े हैं अथवा लाभान्वित हैं।
सविनय निवेदन है कि कुछ लाभ हम वाेटराें काे भी उपलब्ध करायें, उपराेक्त याेजनाओं के द्वारा।
नाेट:- अगर मेरी उपरोक्त बातें अवमानना की श्रेणी में आती हाे ताे, मैं समग्र अधिवक्ता हित में अवमानना की कार्यवाही काे सह्रदय तैयार हूँ।
सभी मित्राें का धन्यवाद के साथ निवेदन है कि उक्त याेजनाओं के लागू हाेने में हाे रहे विलम्ब पर अपने विचार दें।
समझ के परे है यह विलम्ब...???

गुरू काे समर्पित - 3

हमारे एक पिया प्यारा है,
घट घट में उसी का नूर है।
हिन्दू मुस्लिम से भी प्यारा है,
जात पात से भी प्यारा है।
आवे न जावे, मरे ना जीवे,
हमारे एक पिया प्यारा है।

गुरू काे समर्पित - 1

परम पिता परमेश्वर व प्रकृति ने मानव में सिर्फ दाे जाति बनायी और वह है "पुरूष" व "स्त्री" और हम मूर्ख मानवाें ने पता नहीं क्या-क्या बना डाला।

"मैं ही श्रेष्ठ" क्या यह सही है...???

"मैं ही श्रेष्ठ" की भावना हावी हाेना, अधिवक्ता एकता के लिए घातक है। सरकार, न्यायपालिका, अधिकारी सभी अधिवक्ताआें की एकता ताेड़ने के प्रयास में हैं और कहीं कहीं वे सफलता भी पा रहें हैं। उदाहरण- उत्तर प्रदेश के 34 जिलाें में लागू प्रातःकालीन न्यायालय की व्यवस्था समाप्त हाेना इसका प्रमाण है।अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।

वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है :- दुष्यंत कुमार

वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है वे कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तगू
मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है सामान कुछ नहीं है फटेहाल है मगर
झोले में उसके पास कोई संविधान है उस सिरफिरे को यों नहीं बहला सकेंगे आप
वो आदमी नया है मगर सावधान है फिसले जो इस जगह तो लुढ़कते चले गए
हमको पता नहीं था कि इतना ढलान हैदेखे हैं हमने दौर कई अब ख़बर नहीं
पैरों तले ज़मीन है या आसमान है वो आदमी मिला था मुझे उसकी बात से
ऐसा लगा कि वो भी बहुत बेज़ुबान है
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कौन किसका मालिक:-

एक राेज़ सूफ़ी संत 'शेख़ फरीद' अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। तभी एक आदमी वहां से एक गाय को ज़बरदस्ती खींचता हुआ निकला।
यह देखकर फरीद ने अपने शिष्यों से पूछा, "तुम्हारे विचार में कौन किससे बंधा है?"
उनकेे शिष्यों ने जवाब दिया कि स्पष्ट है, गाय ही उस आदमी से बंधी है।
फरीद ने फिर पूछा, "अच्छा यह बताओ, कौन किसका मालिक है?"
सब शिष्य इस अजीब से प्रश्न पर हंसने लगे और बोले कि वह आदमी ही मालिक था और कौन? गाय तो पशु है, वह मनुष्य कि स्वामिनी कैसे हो सकती है?"
"अच्छा, यह बताओ कि अग़र रस्सी को तोड़ दिया जाय तो क्या होगा?" फरीद ने पूछा।
शिष्यों ने उत्तर दिया, "तब तो गाय भागने की कोशिश करेगी।"
"और फिर उस आदमी का क्या होगा?" फरीद ने पूछा।
"स्पष्ट रूप से तब तो यह आदमी गाय का पीछा करेगा और गाय के पीछे-पीछे भागेगा।" तुरंत जवाब आया।
जैसे ही शिष्यों ने यह जवाब दिया, वे समझ गए कि कौन किससे बंधा है?आज यदि हम सोचें कि आज के परपेक्ष्य में हम लोग कार, स्कूटर, बाइक, लैपटॉप, कम्पूटर, डीवीडी, मोबाईल, टीवी इत्यादि भोग विलास की वस्तुओं के मालिक हैं…

कबीर कहिन, सुनत सब पर मानत नाहि:-

साँप के दाँत में विष रहता है, मक्खी के सिर में और बिच्छू की पूँछ में किंतु दुर्जन के पूरे शरीर में विष रहता है। - कबीर
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कष्ट पड़ने पर भी साधु पुरुष मलिन नहीं होते, जैसे सोने को जितना तपाया जाता है वह उतना ही निखरता है। - कबीर
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जिस तरह जौहरी ही असली हीरे की पहचान कर सकता है, उसी तरह गुणी ही गुणवान् की पहचान कर सकता है। – कबीर
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माया मरी न मन मरा, मर मर गये शरीर। आशा तृष्णा ना मरी, कह गये दास कबीर॥ - कबीर
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कबिरा आप ठगाइये, और न ठगिये कोय। आप ठगे सुख होत है, और ठगे दुख होय॥ - कबीर
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यदि सदगुरु मिल जाये तो जानो सब मिल गया, फिर कुछ मिलना शेष नहीं रहा। यदि सदगुरु नहीं मिले तो समझों कोई नहीं मिला, क्योंकि माता-पिता, पुत्र और भाई तो घर-घर में होते हैं। ये सांसारिक नाते सभी को सुलभ है, परन्तु सदगुरु की प्राप्ति दुर्लभ है। - कबीरदास
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केवल ज्ञान की कथनी से क्‍या होता है, आचरण में, स्थिरता नहीं है, जैसे काग़ज़ का महल देखते ही गिर पड़ता है, वैसे आचरण रहित मनुष्‍य शीघ्र पतित होता है। - कबीर
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खेत और बीज उत्‍तम हो तो भी, किसानों के बोने में मुट्ठी के अंतर से बीज कहीं ज्‍यादा कहीं कम पड़ते…

प्रधानमंत्री जी की पार्टी वाले ताे समझे:-

यदि घाटाें काे साफ करने के कार्य काे चुनाव में टिकट पाने का पैमाना बना दिया जायें, ताे हर घाट पर सिर्फ एक ही पार्टी के लाेग दल-बल के साथ रियाज़ करते हुये पायें जायेंगे।
जय हाे गंगा मइया की।पहले प्रधानमंत्री जी की पार्टी वाले ताे समझे कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता पर इतना ज़ाेर क्याें दिया है। हमारे प्रधानमंत्री जी ताे समझ गये हैं, इसीलिए उन्होंने 2 अक्टूबर काे स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की है। परन्तु अभी पार्टी के लाेगाें यह समझ में नहीं आ रहा। वे साेचते हैं कि यह अभियान भी माेदी जी का प्रचार अभियान मात्र है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में रविवार को गंगा घाटों की सफाई का भाजपा का तीन घंटे का महाअभियान दो घंटे में ही खत्म हो गया। इस दौरान चमके घाटों की ही सफाई की रस्म अदायगी नजर आई। अभियान में दस हजार सदस्यों के शामिल होने का दावा किया गया था, दिखे हजार भी नहीं।झाड़ू लगाने के बाद कूड़े को काली पालीथिन बैग में भरकर निस्तारित किया गया। हालांकि, निस्तारण कार्य में घोर लापरवाही बरती गई। घाटों पर ही कूड़े की पालीथिन छोड़ लोग चलते बने। कुछ घाटों पर कूड़े में आग भी लगा दी गई। …

माेदी जी काे धन्यवाद क्योंकि उनके प्रयास से 10000 साेये भा.ज.पा वालाें ने झांडू उठाया है:-

"घाटाें की सफाई किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, यह जिम्मेदारी हर उस व्यक्ति, हर उस विभाग की है जाे वाराणसी के घाटाें से लाभान्वित हाेता है अथवा उसपर राजनीति कर सत्ता में आता रहा है। चाहे वे सांसद हाे, विधायक हाे, पार्षद हाे या अन्य।" संत रैदास ने कहा 'कठौती में गंगा' ताे सबने कुछ और ही समझा। परन्तु उनका आशय यह हाे सकता है कि "गंगा का जल प्रकृति की कठौती में है, मन चंगा रखाे ताे गंगा स्वत: स्वच्छ हाे जायेगी।" यहां ताे सिर्फ मां गंगा का निरन्तर दाेहन हाे रहा है, कभी व्यक्तिगत लाभ हेतु, कभी राजनैतिक लाभ के लिए।  10000 भा.ज.पा कार्यकर्ता आज घाट साफ करने उतरे हैं। ये 10000 कार्यकर्ता माेदी जी के प्रधानमंत्री बनने का इन्तजार कर रहे थे क्या..??? माेदी जी के सांसद बनने के बाद वाराणसी के भा.ज.पा कार्यकर्ताओं काे घाट की सफाई याद आयी। लगता है प्रधानमंत्री के चाटुकार जाग गये हैं।  पूर्व में भी ताे यहां वाराणसी में आपके सांसद थे तब आप 10000 कहाँ थे...??? बाहरी गुजराती ने कहा ताे आप 10000 घाट की सफाई करने काे चल पड़े। क्या स्वयं काे कभी घाट गंदा नहीं लगा...??? मेयर कई वर्ष…

उत्तर प्रदेश शासन का अधिवक्ता हित में महत्वपूर्ण निर्णय:-

अधिवक्ताआें काे 5 लाख बीमा के लिए नहीं देना हाेगा काेई अंशदान। परन्तु शासन ने यह भी दिशा-निर्देश दिया है कि यदि उक्त के लिए उ.प्र. अधिवक्ता कल्याण अधिनियम, 1974 में संशोधन अपेक्षित हाे ताे प्रस्ताव शासन काे उपलब्ध कराये।
अर्थात्
मृत अधिवक्ताआें के परिजनों काे अभी भी 5 लाख नहीं मिलने जा रहा...???