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काशी साईं फाउंडेशन के निवेदन पर जिलाधिकारी वाराणसी ने दिया टाउन हाल स्थित "भारत के राष्ट्रीय प्रतीक - अशोक स्तम्भ" के रख रखाव का आदेश :-

अंशुमान दुबे (अधिवक्ता) एवं सचिव, काशी साईं फाउंडेशन के अंशदान रुपये 2,100/- एवं निवेदन पत्र दिनांक 25-09-2013 पर जिलाधिकारी वाराणसी ने टाउन हाल स्थित "भारत के राष्ट्रीय प्रतीक - अशोक स्तम्भ" के सौन्द्रयीकरण, रख रखाव व साफ सफाई यथाशीघ्र कराने का आदेश दिनांक 19-10-2013 को नगर आयुक्त, नगर निगम, वाराणसी को दिया है। 
Web link:-


जिलाधिकारी वाराणसी का आदेश दिनांक 19-10-2013 

काशी साईं फाउंडेशन का निवेदन पत्र दिनांक 25-09-2013
टाउन हाल स्थित "भारत के राष्ट्रीय प्रतीक - अशोक स्तम्भ"

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अधिवक्ता दिवस-2013 की शुभकामना || Wishes for Advocate's Day-2013

3rd December, 2013 an "Advocate's Day".
Be United & Fight for our Rights.
with lots of Wishes & Regards
Anshuman Dubey Adv.

अधिवक्ता दिवस-2013 की शुभकामनाओ के साथ,  सदैव आप के स्नेह और सहयोग का आभारी...
आपका प्रिय
अंशुमान दुबे, अधिवक्ता

Mo. 9415221561
http://a3advocate.blogspot.in/
~ * ~
Web link for Advocate's Day of
Adhivakta Pension Vikas Samiti, Varanasi:-
http://advocatepension.blogspot.in/2011/12/happy-advocates-day.html

भारत में बाल यौन शोषण कानून :-

भारत में बाल यौन शोषण कानून को बाल संरक्षण नीतियों के भाग के रूप में अधिनियमित किया गया है। भारत की संसद ने 22 मई 2012 को "लैंगिक अपराध से बालकों का संरक्षक अधिनियम, 2011" (Protection of Children Against Sexual Offences Bill, 2011) पारित कर दिया, जिसे लैंगिक हमला, लैंगिक उत्पीड़न और अश्लील साहित्य के अपराध से बालकों का संरक्षण करने और ऐसे अपराधों का विचारण करन के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना तथा उनसे सम्बंधित या आनुषंगिक विषयों के लिए उपबंध करने के लिए अधिनियम बनाया गया है । कानून के अनुसार सरकार द्वारा तैयार नियम भी 14 नवंबर, 2012 को अधिसूचित किया गया है और कानून लागू करने के लिए तैयार हो गया है। भारत के 53 प्रतिशत बच्चे यौन शोषण का किसी ना किसी रूप में सामना करते हैं। इन हालत में कड़े कानून की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी।  यौन अपराधों के कानून से बच्चों का संरक्षण: - नए कानून के तहत बाल अपराधों की कई किस्म प्रदान की गयी है जिसके माध्यम से आरोपी को हर हाल में दंडित किया जा सकता है। नए कानून के माध्यम से बाल अपराधों को विस्तारित किया गया है अब यौन उत्पीड़न ही नही …